गूगल के प्ले स्टोर की इन 25 ऐप्स में मिला मालवेयर, हटाया गया
RekhaSingh - अक्टूबर 22, 2019
गूगल ने एक बार फिर से सफाई अभियान चलाते हुए अपने प्ले-स्टोर से 25 एंड्रॉयड एप को डिलीट किया। गूगल ने 25 एप्स को स्टोर से हटाया है इन सभी एप्स में एडवेयर था।
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गूगल ने एक बार फिर से सफाई अभियान चलाते हुए अपने प्ले-स्टोर से 25 एंड्रॉयड एप को डिलीट किया है। गूगल ने जिन 25 एप्स को स्टोर से हटाया है इन सभी एप्स में एडवेयर था।
मोबइल फोन पर ऐप न हो तो वो फोन किस काम का। मगर कई बार जाने अजनाने में हम कुछ ऐसे ऐप डाउनलोड कर लेते है जो हमारी निजी जानकारी चुरा लेते हैं। जिसका खामियाजा हमें बाद में भुगतना पड़ता है। गूगल के प्ले स्टोर पर भी ऐसे कई ऐप है जिनको डाउनलोड करने के बाद आपकी निजी जानकारी दुसरो के पास पहुँच जाती है।
गूगल के प्ले स्टोर की ऐप् में मिला मालवेयर
गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे फर्जी ऐप से निपटने के सफाई अभियान चलाया गया। जिसमें 25 से अधिक ऐप फर्जी पाए गये थे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि गूगल प्ले स्टोर पर फर्जी एप पाए गए हैं। गूगल का कहना है की इन 25 नकली एप के माध्यम से मेलवेयर कैंपेन चलाया गया था, जिसमें यूजर्स के डिवाइस में वायरस डाला जा रहा था। सिमेंटेक को पता चला कि ये ऐप समान कोड संरचना साझा करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक ही डेवलपर द्वारा बनाए गये होगे।
हैकर्स ने प्रो ब्यूटी कैमरा और फनी स्वीट ब्यूटी कैमरा एप में एडवेयर डाला है, जिससे यूजर्स को जबरन ऐड दिखाए जाते हैं। पर अफ़सोस की बात है जब तक गूगल को इस बारे में भनक लगी तब तक 2।1 मिलियन लोग इसे डाउनलोड कर चुके थे। हालांकि इन एप्स को अब प्ले-स्टोर से डिलीट कर दिया गया है।
सिमेंटेक के अनुसार जब कोई ऐसे ऐप को डाउनलोड करता है तो उसको एप्लिकेशन को इंस्टॉल करने के बाद, उसका आइकन छिपा दिया जाता है। फिर किसी विज्ञापन को फ़ुल-स्क्रीन मोड में प्रदर्शित किया जाएगा। यह ऐड आपको यह नहीं बताते की यह विज्ञापन किस ऐप से आते हैं। यह ऐप आप तब भी देखते है जब उस ऐप को बंद भी कर देते हैं। ऐसा करने पर आप यह नहीं समझ पाते की ये ऐड हमें किस ऐप की वजह से दिखाई दे रहे हैं। सिमेंटेक के अनुसार यह विज्ञापनों को प्रदर्शित करके सिर्फ पैसा कमाना चाहते हैं।
सिमेंटेक के अनुसार जो मैलवेयर युक्त ऐप है वो भी उन्ही आर्गेनाइजेशन के द्वारा बनाए जाते है जो मैलवेयर मुक्त ऐप बनाते है, क्योकिं इन ऐप में बहुत समनाता होती है। इनको जिस प्रकार से पब्लिश किया जाता है उससे यूजर्स आसानी से भ्रम में आ जाते है। प्रत्येक ऐप के दो संस्करण होंगे, एक मैलवेयर मुक्त है और दूसरा एडवेयर से भरा है। हम लोग वैसे तो मैलवेयर मुक्त संस्करण को शीर्ष स्थान देते है, लेकिन परेशानी तब पैदा होती है, जब हम किसी ऐप को नाम से खोजते है। उस स्थिति में यूजर्स के पास 50-50 चान्स होते है इन्हें डाउनलोड करने के।
ऐसे ऐप हर बार पुराने ऐप से अलग होते हैं। उनके काम करने के तरीका भी अलग होता हैं। इनके पास कॉन्फ़िगरेशन फ़ाइलों का रिमोट स्विच होता है, इसलिए जब गूगल सिक्योरिटी टेस्ट का परीक्षण करता है, तो उन्हें कोड में कोई समस्या नहीं मिल सकती है।
सिक्सियोरिटी कम्पनी सिमेंटेक को अक्सर गूगल के प्ले स्टोर पर मैलवेयर से भरे ऐप मिलते हैं। जिसकी वजह से उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल उठता है। वैसे गूगल अपने यूजर्स की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहता है लेकिन हर बार ऐसे ऐप गूगल की सुरक्षा में सेंध लगा देते है।
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